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संविता
     

1990 के दशक के अंत तथा 2000 के शुरूआती दौर में सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता मंत्रालय ने यह अनुभव किया कि तत्कालीन गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने तथा उनके कार्यक्षेत्र में विस्तार के लिए नए गैर सरकारी संस्थाओं को शामिल किया जाना जरूरी है। इस उद्देश्य से मंत्रालय ने यू.एन.ओ.ड़ी.सी. क़े साथ मिलकर नशीली दवाओं की मांग को कम करने के लिए ई40 तथा ई 41 नाम से एक देशव्यापी कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम के तहत क्षेत्रीय संसाधन तथा प्रशिक्षण केंद्रों (आर.आर.टी.सी.) विकसित करने की योजना थी। चूंकि यह कार्यक्रम दिसंबर 2002 में समाप्त हो रहा था, मंत्रालय, यू.एन.ओ.ड़ी.सी तथा विश्व श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) ने इस अवधि के बाद भी चलने वाली एक टिकाउ संरचना को विकसित करने की जरूरत महसूस की। पूरे देश से 8 शीर्ष गैर सरकारी संस्थाओं की पहचान और उनका चयन इस कार्य के लिए किया गया और इसे क्षेत्रीय संसाधन तथा प्रशिक्षण केंद्र (यू.एन.ओ.ड़ी.सी) क़हा गया। इन संस्थाओं का चयन मुख्यत: उनकी क्षमता, अनुभव तथा मादक दवाओं की मांग कम करने के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर किया गया।

लोगों के बीच अपनी पहुच और प्रभावोत्पादकता को बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के मादक द्रव्य नियंत्रण कार्यक्रम, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय कार्यालय (यू.एन.ओ.ड़ी.सी –आर.ओ.एस.ए.) क़े साथ मिलकर देश्के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैर सरकारी संस्थाओं में अवस्थित आर.आर.टी.सी. क़ा चयन किया है। आर.आर.टी.सी. सेवादाताओं के पेशेवर विकास के लिए उन्हें आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण देने, तकनीकी आपद सहायता (बैक-स्टॉपिंग), कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग, विभिन्न क्षेत्रों में नशीली दवाओं के दुरूपयोग की दशा-दिशा पर नजर रखने और तदनुरूप आवश्यक राष्ट्रीय हस्तक्षेपों के लिए एनसीड़ैप तथा मंत्रालय को आवश्यक जानकारी देने के लिए उत्तरदायी है।

राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के अंदर मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध के राष्ट्रीय केंद्र (एनसीड़ैप) क़ी स्थापना तत्कालीन मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध ब्यूरो के स्थान पर सितंबर 1998 मे की गयी थी। भारत सरकार के मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध कार्यक्रमों के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान करना इसका मुख्य कार्य था। सेवाओं के क्षेत्र को देशव्यापी स्तर पर और भी व्यापक बनाने तथा मादक दवाओं की मांग को घटाने संबंधी सेवाओको बेहतर बनाने तथा सेवाप्रदान के स्तर में गुणात्मक सुधार के लिए यह केंद्र अपने कार्यक्रमों के क्षेत्र में लगातार विस्तार कर रहा है। इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे सेवादाताओं की क्षमताओं को सुदृढ़ करनेलिए अवसर प्रदान करना तथा मादक दवाओं के दुरूपयोग की दशा-दिशा एवं सेवादायी व्यवस्थाओं की प्रभावोत्पादकता के बारे में पूरी जानकारी रखना इस केंद्र के क्रियाकलाप की मुख्य धुरी है।

 

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मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध के राष्ट्रीय केंद्र (एनसीड़ीएपी) क़ी स्थापना राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के अंतर्गत सितंबर 1998 में तत्कालीन मादक द्रव्य दुरूपयोग निवारण ब्यूरो के स्थान पर भारत सरकार के मादक द्रव्य दुरूपयोग निवारण संबंधी कार्यक्रमों मे तकनीकी सहयोग देने के लिए की गयी। देश में सेवाओं को और भी व्यापक स्तर पर उपलब्ध करवाने तथा सेवाओं की मे गुणात्मक सुधार के लिए यह केंद्र अपनी पहुंच लगातार बढ़ातरहा है। इसके कार्यों का मुख्य बिंदु है नशीली दवाओं की मांग को नियंत्रित करने के क्षेत्र मे कार्यरत सेवा प्रदाताओं की क्षमता को बढ़ाने के लिए अवसर प्रदान करना, नशीली दवाओं के दुरूपयोग की दशा दिशा तथा सेवाओं की प्रभावोत्पादकता के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाना।

   
 

उद्देश्य एवं लक्ष्य

नशीली दवाओं की मांग को कम करने तथा संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की योग्यता के स्तर का विकास

मादक द्रव्य दुरूपयोग निरोध के क्षेत्र में दी जा रही सेवाओं का मानकीकरण

नशीले दवाओं दुरूपयोग की दशा-दिशा के बारे में ताजा सूचनाएं जमा कर तथा स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे कार्यो का डेटाबेस बनाना।

नशीली दवाओं के दुरूपयोग को रोकने के क्षेत्र में सामाजिक पैरवी तथा नेटवर्किंग व्यवस्थाओं का निर्माण।

 
 
 

इंगित समूह:

यह केंद्र मंत्रालय द्वारा सहायता प्राप्त चिकित्सा एवं पुनर्वास केंद्रों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं की प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है। इनमें प्रोजेक्ट अधिकारी,, सलाह सेवाएं देने वाले,सामाजिक कार्यकर्ता, लोगों के बीच जाकर काम करने वाले, नर्स, वार्ड में सेवा करने वाले तथा देखभाल करने वाले लोग सम्मिलित हैं। यह केंद्र संबंधित सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों जैसे कि स्वास्थ्य, युवा कार्य, जेल और सुधार संबंधी कार्यों में शामिल संस्थाएं तथा संबंधित क्षेत्रों (जिसमें एचअाईवीएड्स भी शामिल है) में काम करने वाली गैर सरकारी संस्थाओं के लिए भी जरूरत के आधार पर प्रशिक्षण् कार्यक्रम चलाती है।

 
 
 

कार्यकलाप

नशीली दवाओं की मांग को घटाने के लिए काम कर रहे विभिन्न स्तरों के कार्यकर्ताओं की क्षमता में विकास

सूचनाओं को ताजा बनाए रखना और आवश्यक डेटाबेस तथा काम के देखभाल के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का विकास

संपर्को को स्थापित करना

सार्वजनिक पैरवी में मदद करना तथा नशीली दवाओं के प्रयोग को कम करने के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्री. स्तर पर संपर्कतंत्र की व्यवस्था में मदद करना

 

यह केंद्र नशीली दवाओं के दुरूपयोग की सीमा पर नजर रखने के लिए 'डैम्स' (डीएएमएस) क़ार्यक्रम भी लगातार रूप से चला रहा है। केंद्र ने समुदाय में जाकर काम करने में मदद देने तथा क्षमता निर्माण के लिए कई डेटाबेस भी बनाए हैं जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार है

नशीली दवाओं की मांग घटाने के विभिन्न पहलुओं पर उपलब्ध जानकारी को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए nisd.gov.in वेबसाइट का विकास।

गैर सरकारी संगठनों तथा सेवा प्रदाताओं और उनके संगठनों के परिचय का डेटाबेसनशीली दवाओं की मांग को कम करने तथा एचअाईवीएड्स को रोकने के काम में लगे हुए संसाधन श्रोतव्यक्तियों तथा प्रशिक्षकों का डेटाबेस

नशाखोर निषेध के राष्ट्रीय केंद्र (एनसी ड़ैप)तथा संयुक्त राष्ट्रसंघ के नशाखोरी निषेध तथा अपराध  (यू.एन.ओ.ड़ी.सी.) क़े द्वारा प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं तथा सेवा प्रदाताओं का डेटाबेस

दस्तावेजीकरण-
नशीली दवाओं की मांग को कम करने से संबंधित विषयों-जैसे नशे के आदी व्यक्ति का आकलन, लत छूटना या सुधार,, व्यक्तिगत सलाह सेवाएं, परिवार और नशे की लत, पारिवारिक सलाहसेवाएं, देखभाल के बाद की सेवाएं, लत फिर से पकड़ लेने पर उसका प्रबंधन तथा समुदाय को इससे बचाना, पर केंद्र ने यू.एन.ओ.ड़ी.सी. तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) क़े साथ मिलकर कुछ खास विषय आधारित पुस्तिकाएं बनायी हैं।

विकसित किए गए पाठयक्रम-
केंद्र ने नशे की लत छुड़ाने से संबंधित सलाह सेवाओं तथा पुनर्वास के लिए तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स चलाया है। इसके अलावा का मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध विषय पर आधारभूत पाठयक्रम भी चलाया गया है। कोर्स की रूपरेखा और इसके बारे में विस्तृत जानकारी परिशिष्ट में दी गयी है।

प्रशिक्षण मॉडयूल-
नशीली दवाओं की मांग को कम करने से संबंधित विषयों पर केंद्र ने कुछ छोटी छोटी प्रशिक्षण मार्गदर्शिकाएं तथा मॉडयूल बनाए हैं।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको), स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय के एच.आई.वी.एड्स रोकथाम कार्यक्रम को सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सहायता प्राप्त गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे 100 नशामुक्ति केंद्रों के मादक द्रव्य दुरूपयोग कार्यक्रमों में शामिल किया जाना इस केंद्र की एक सफल पहल रही है। इसके लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) के साथ मिलकर एनसीड़ैप इन केंद्रों से संबद्ध सभी जमीनकार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दे रही है।

यू.एन.ओ.ड़ी.सी. तथा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने साथ मिलकर दो कार्यक्रम चलाए हैं-एड़ी / आई.एन.ड़ी. / 99 / ई 40 (भारत मे पूरे समुदाय के अंदर मादक दवाओं की मांग में कमी)  तथा एड़ी / आई.एन.ड़ी. / 99 / ई 41 (भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों के अंदर समुदायों मे नशीली दवाओं की मांग मे कमी )। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था देशव्यापी स्तर पर नशीली दवाओं की मांग कम करने के लिए कार्यक्रमों को लगातार चलाने में मदद करने के आवश्यक ढांचा खड़ा करने में सरकार को मदद करना। प्रोजेक्ट ई-40 समुदाय आधारित संगठनों तथा अन्य प्रयासों को लामबंद कर देश में मादक दवाओं के दुरूपयोग को कम करने और रोकने के लक्ष्य से शुरू किया गया।

नशाखोरी निषेध के राष्ट्रीय केंद्र (एनसीड़ैप) ने विश्व श्रम संगठन के साथ मिलकर कुछ चुनिंदा उद्योगों एवं स्वैच्छिक समूहों के सहयोग से शराबखोरी तथा मादक दवाओं के कार्यस्थल पर दुरूपयोग को रोकने के लिए देश के कुछ बड़े औद्योगिक शहरों में प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम चलाया है।

एनसीड़ैप कोलंबों योजना के साथ मिलकर भी अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत  नयी दिल्ली में 'जेलसुधारगृहों में उपचार तथा पुनर्वास का प्रबंधन' विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कारागारों तथा सुधारगृहों के अंदर मादक दवाओं से संबंधित समस्याओं की वृद्धि को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

लोगों के बीच जाकरप्रचार प्रसार संबंधी कार्य
स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी पहुच का विस्तार करने तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा अन्य प्रयासों को विकेंद्रित करने के दृष्टिकोण से एनसीड़ैप ने क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण एवं सूचना प्रदान करने के लितकनीकी क्षमता वाले 8 गैर सरकारी संस्थाओं के साथ 8 क्षेत्रीय प्रशिक्षण संसाधन केंद्रों (आर.आर.टी.सी.)क़ा चुनाव किया है। इन केंद्रों को कार्यक्रमों की नियमित देखरेख, सेवा प्रदाताओं के लिए प्रशिक्षण्की जरूरतों के आकलन तथा क्षेत्रीय स्तर पर सामाजिक पैरवी का काम भी सौंपा गया है। देश के आकार तथा क्षेत्रीय विविधताओं को देखते हुए विविध रणनीतियों की जरूरत होती है। इस बात को ध्यान मे रखते हुए ऐसा करना उचित एवं व्यावहारिक समझा गया। केंद्र अपने प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण के कार्यक्रमों के द्वारा सभी सरकारी विभागों तथा गैर सरकारी क्षेत्र द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक पैरवी, रोकथाम एवं पुनर्वास कार्यक्रमों एक साथ लाने मे सफल हुआ।

नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए आवश्यक सेवाओं का दायरा बढ़ाने की अपनी कोशिशों के अंतर्गत गुणात्मक सुधार के लिए एनसीड़ैप इंटरनेट का भी प्रयोग कर रहा है देखें
www.nisd.gov.in

 
 
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